पहली संतान के बाद मीना के खाते में पहुंची 5 हजार की मदद, मातृत्व के सफर में मिला आर्थिक संबल
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की पहल से मिली योजना की जानकारी, चैनपुर की मीना को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का मिला लाभ
रायपुर -पहली बार मां बनने का एहसास जितना खास होता है, उतनी ही बढ़ जाती हैं नई जिम्मेदारियां। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म तक स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल से जुड़ी जरूरतों के बीच आर्थिक सहायता परिवार के लिए राहत बनती है। मनेंद्रगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत चैनपुर निवासी मीना कुमारी जी को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली संतान पर 5 हजार रुपए की सहायता राशि मिली। यह राशि उनके लिए मातृत्व के दौरान आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार बनी।
गांव में ही मिली योजना की जानकारी
मीना कुमारी जी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ( PMMVY) के बारे में जानकारी दी। कार्यकर्ता ने योजना की पात्रता, मिलने वाली सहायता और आवेदन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।
आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने सहयोग किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद मीना कुमारी को योजना के तहत 5 हजार रुपए की सहायता राशि प्राप्त हुई।
मिली सहायता मेरे लिए उपयोगी रही
मीना कुमारी ने बताया कि योजना के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी रही। उन्होंने योजना की जानकारी समय पर देने और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया में सहयोग के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के प्रति आभार व्यक्त किया।
चैनपुर की मीना की कहानी यह भी दिखाती है कि जब शासन की योजनाओं की जानकारी गांव स्तर पर समय पर मिलती है और मैदानी कार्यकर्ता आवेदन में सहयोग करते हैं, तो पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचना आसान हो जाता है।
पहली संतान पर 5 हजार, दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पात्र महिलाओं को पहली जीवित संतान के लिए 5 हजार रुपए की सहायता निर्धारित प्रावधानों के अनुसार दी जाती है। वहीं दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता का प्रावधान है। मीना कुमारी जी को पहली संतान के लिए योजना के तहत 5 हजार रुपए की सहायता राशि प्राप्त हुई है।
आर्थिक सहायता के साथ स्वास्थ्य और पोषण पर जोर
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण को बढ़ावा देना है। योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को उचित पोषण के लिए प्रोत्साहित करने, आवश्यक प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।
गर्भावस्था के दौरान होने वाली संभावित आय की क्षति की आंशिक भरपाई के रूप में भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। पात्र महिलाओं को आवेदन एवं पंजीयन की प्रक्रिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और आशा कार्यकर्ता सहयोग प्रदान करती हैं।
समय पर पंजीयन से सुरक्षित मातृत्व की ओर कदम
गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही समय पर पंजीयन कराने, निर्धारित प्रसव पूर्व जांच कराने, आयरन एवं कैल्शियम की गोलियों का नियमित सेवन करने और संस्थागत प्रसव कराने पर जोर दिया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद समय पर टीकाकरण भी जरूरी है।
चैनपुर की मीना कुमारी की कहानी बताती है कि शासन की आर्थिक सहायता और गांव स्तर पर कार्यकर्ताओं की पहल मिलकर मातृत्व के इस महत्वपूर्ण दौर में परिवार को संबल दे सकती है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सामने आ रही ऐसी कहानियां योजनाओं के जमीनी प्रभाव की तस्वीर पेश कर रही हैं।