सेवा संकल्प अभियान: केल्हारी और पसौरी में ग्रामीणों ने सीखे जल शुद्धता जांचने के गुर

FTK किट से महिलाओं ने खुद जांची पानी की गुणवत्ता, जल संरक्षण और सुरक्षित पेयजल को लेकर किया जागरूक

सेवा संकल्प अभियान: केल्हारी और पसौरी में ग्रामीणों ने सीखे जल शुद्धता जांचने के गुर

रायपुर -एमसीबी सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल और जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम केल्हारी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र एवं ग्राम पंचायत भवन पसौरी में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत विशेष जल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों एवं स्व-सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को जल गुणवत्ता की जांच, जल स्रोतों के रख-रखाव, स्वच्छ पेयजल और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें स्थानीय स्तर पर जल सुरक्षा को लेकर अधिक सक्षम बनाना रहा।

FTK किट हाथ में लेकर महिलाओं ने खुद जांचा पानी

कार्यक्रम की सबसे खास गतिविधि रही फील्ड टेस्ट किट (FTK) से जल गुणवत्ता जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण। विभागीय प्रशिक्षकों ने ग्रामीणों और महिलाओं को FTK के माध्यम से पानी की गुणवत्ता जांचने की पूरी प्रक्रिया समझाई।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने स्वयं पानी के नमूने लेकर उनकी जांच की और pH मान, कठोरता, आयरन, नाइट्रेट एवं बैक्टीरिया जैसे विभिन्न मानकों की जांच करने की प्रक्रिया सीखी। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें अपने गांव में पेयजल की गुणवत्ता की प्रारंभिक जांच करने के लिए व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाता रहा।

इस प्रशिक्षण के बाद ग्रामीण जल गुणवत्ता को लेकर अधिक सजग होकर अपने आसपास के पेयजल स्रोतों की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।

जल स्रोतों की स्वच्छता से जुड़ा स्वास्थ्य

कार्यक्रम में ग्रामीणों को समझाया गया कि सुरक्षित पेयजल सीधे तौर पर परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा है। दूषित पानी के सेवन से होने वाली विभिन्न जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए पेयजल स्त्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।

ग्रामीणों को पानी को आवश्यकतानुसार उबालकर, छानकर अथवा सुरक्षित तरीके से शुद्ध कर उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही जल स्रोतों के आसपास गंदगी एवं जल जमाव नहीं होने देने तथा हैंडपंप, कुएं और अन्य पेयजल स्रोतों को स्वच्छ रखने के व्यावहारिक उपाय बताए गए।

कुएं-तालाब बचेंगे तो पानी का संकट भी घटेगा

प्रशिक्षण के दौरान जल संरक्षण और जल संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया गया। ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन अपनाने तथा गांव में उपलब्ध पारंपरिक जल स्रोतों कुएं, तालाब एवं अन्य जल स्रोतों को संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया गया।

ग्रामीणों को बताया गया कि जल संकट से निपटने के लिए केवल नए जल स्रोत विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपलब्ध जल स्रोतों को स्वच्छ रखना और वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजना भी जरूरी है।

महिलाओं की भागीदारी से मजबूत होगी जल सुरक्षा

जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित प्रशिक्षण में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। FTK के माध्यम से पानी की जांच की प्रक्रिया सीखने से महिलाएं अपने परिवार और गांव में स्वच्छ पेयजल की निगरानी और जागरूकता की जिम्मेदारी में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल सुरक्षा केवल विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समुदाय की सामूहिक भागीदारी से ही उसे स्थायी बनाया जा सकता है।

जल ही जीवन है, शुद्ध जल स्वस्थ जीवन का आधार

कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों को जल के महत्व और प्रत्येक बूंद के संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। “जल ही जीवन है, शुद्ध जल स्वस्थ जीवन का आधार है” के संदेश के साथ ग्रामीणों से पेयजल स्रोतों को स्वच्छ रखने, पानी की बर्बादी रोकने और जल संरक्षण के उपायों को दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की गई।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, पंच-सरपंच, जल जीवन मिशन के समन्वयक, स्व-सहायता समूह की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।