अंततः मादा भालू अपने शावकों के साथ पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजी गई, आमजनों ने राहत की सांस ली
जिला ब्यूरो मृत्युन्जय सोनी
एमसीबी/मनेंद्रगढ़ नगर एवं उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कई महीनों से मादा भालू अपने दो शावकों के साथ लगातार विचरण कर रही थी। इस दौरान कई बार भालू द्वारा लोगों पर हमले की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था। स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने पर प्रशासन और वन विभाग का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराया गया। लगातार प्रयासों और समन्वय के बाद अंततः वन विभाग तथा कानन पेंडारी से आई विशेषज्ञ टीम, जिसमें डॉ चंदन कानन पेंडारी से व डॉ अजीत पाण्डेय एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर रमकोला,के संयुक्त सहयोग से इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। विशेषज्ञों ने पूरी सावधानी, सूझबूझ और वैज्ञानिक तरीके से पिंजरा लगाकर मादा भालू एवं उसके दोनों शावकों को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया। किसी भी प्रकार की जनहानि या वन्य प्राणी को नुकसान पहुंचाए बिना इस अभियान को पूरा किया गया, जो वन विभाग की कार्यकुशलता और अनुभव का परिचायक है। वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि पकड़े गए मादा भालू और उसके शावकों को अब एक सुरक्षित और उपयुक्त जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में बिना किसी खतरे के रह सकें और भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की पुनरावृत्ति न हो। इस कार्रवाई के बाद मनेंद्रगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने राहत की सांस ली है। इस अवसर पर भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने क्षेत्र की जनता, वन विभाग के एसडीओ, वन परिक्षेत्राधिकारी मनेंद्रगढ़, कर्मचारियों एवं कानन पेंडारी से आई पूरी टीम को इस सफल और सराहनीय कार्य के लिए बधाई एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की जान-माल की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस अभियान ने इसका एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। स्मरणीय है कि वनों की कटाई से वन्य प्राणियों का निवास स्थान व उनके भोजन की व्यवस्था अव्यवस्थित हो रही जिससे इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।