पनिका समाज का हक-अधिकार संग्राम तेज, काला दिवस पर चिरमिरी में उमड़ा जनसैलाब
काला दिवस पर चिरमिरी में पनिका समाज ने आदिवासी दर्जे की मांग को लेकर पदयात्रा व ज्ञापन सौंपा, मांग पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी
एमसीबी - पनिका समाज को पुनः आदिवासी दर्जा दिलाने की मांग को लेकर युवा पनिका समाज चिरमिरी के नेतृत्व में काला दिवस पर भव्य पदयात्रा एवं ज्ञापन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजन, युवा, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा मिली। बताया गया कि 08 दिसंबर 1971 को तत्कालीन सरकार द्वारा पनिका समाज को आदिवासी वर्ग से हटाकर अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल कर दिया गया था, जिसे समाज आज तक एक ऐतिहासिक अन्याय के रूप में देखता आ रहा है। इसी पीड़ा के विरोध में हर वर्ष 8 दिसंबर को पनिका समाज काला दिवस के रूप में मनाते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन करता आ रहा है। इस वर्ष भी इसी क्रम में युवा पनिका समाज चिरमिरी के अध्यक्ष शंकर प्रसाद राउर के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय, चिरमिरी में महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। यह आंदोलन केवल चिरमिरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में एक साथ आयोजित किया गया। विशेष रूप से एमसीबी जिले में मनेंद्रगढ़ कलेक्ट्रेट और चिरमिरी एसडीएम कार्यालय में एक साथ ज्ञापन सौंपे गए।
इस अवसर पर अध्यक्ष श्री शंकर प्रसाद राउर ने कहा कि
"1971 से पहले पनिका समाज को आदिवासी समुदाय का संवैधानिक दर्जा प्राप्त था, लेकिन साजिश के तहत उसे छीन लिया गया। तब से लेकर आज तक समाज अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष करता आ रहा है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। यदि 14 दिसंबर से शुरू हो रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र में सरकार द्वारा इस विषय पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले 30 दिनों के भीतर युवा पनिका समाज उग्र आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा। आवश्यकता पड़ने पर रायपुर से दिल्ली तक तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का भी निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम के समापन पर


शंकर प्रसाद राउर ने सभी उपस्थित समाजजनों का हार्दिक आभार एवं अभिनंदन व्यक्त किया और समाज की एकजुटता को आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बताया।