लोकल फॉर वोकल कवियों ने राज्योत्सव में बिखेरी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की महक
जिला ब्यूरो मृत्युंजय सोनी
मनेंद्रगढ़ - राज्योत्सव रजत महोत्सव के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन “लोकल फॉर वोकल” थीम पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के प्रसिद्ध कवियों ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति, मातृभूमि के वैभव और जनभावनाओं को अपनी कविताओं के माध्यम से जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का संचालन व्यंग्यकार राजेश जैन ने किया। शुरुआत समाजसेवी डॉ. रश्मि सोनकर ने छत्तीसगढ़ी भाषा की मधुरता पर आधारित गीत से की — “हमर भाखा हमर गुरतुर बोली, छत्तीसगढ़ी जैसे मदरस के गोली।”
वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव ने उत्तर से दक्षिण तक छत्तीसगढ़ के विकास की गाथा सुनाई, वहीं कवि सतीश द्विवेदी ने राष्ट्रभक्ति की ओजपूर्ण कविता “सरहदों को लेके लड़ते रहते हम, सरहदों को लेके मिटते रहते हम” से वातावरण को देशभक्ति में रंग दिया। कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती ने स्त्री सशक्तिकरण और प्रकृति प्रेम पर अपनी रचना “स्त्री होना ऋणी होना नहीं है, प्रकृति होना है” प्रस्तुत की। राज्य भाषा आयोग के जिला समन्वयक बिनोद तिवारी ने छत्तीसगढ़ महतारी की महिमा का गायन किया, जबकि मृत्युंजय सोनी ने पिता की नसीहत और समाज के यथार्थ पर आधारित भावुक कविता सुनाई —
“बेटे, इतने भले भी मत बनना, जितना सड़क किनारे आम का पेड़ होता है...”
कार्यक्रम के संचालक राजेश जैन ने बालिकाओं की सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता पर व्यंग्यात्मक पंक्तियों से श्रोताओं को सोचने पर विवश किया —
“बहुत हुआ रावण का वध श्रीराम आपके हाथों से, इस बार दहन सीता कर ले रावण को अपने हाथों से।”
पहलगांव आतंकी हमले पर वीर रस से ओतप्रोत कविता “निहत्थों पर जो वार किए...” ने सभागार में जोश भर दिया।
राज्योत्सव के इस कवि सम्मेलन ने छत्तीसगढ़ी अस्मिता, संस्कृति और सृजनशीलता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।