शिक्षक पढ़ेंगे तभी विद्यार्थियों को पढ़ा सकेंगे - अतुल कुमार वर्मा
जिला ब्यूरो मृत्युन्जय सोनी
एमसीबी/शिक्षक वह है जो शिष्य का न केवल ज्ञान बढ़ाएं बल्कि वह है जो शिष्य को ज्ञानी के साथ सामाजिक व व्यवहारिक भी बनाए।
उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन अभियान के अंतर्गत शासकीय नवीन महाविद्यालय जनकपुर में आयोजित “भारतीय ज्ञान प्रणाली: प्राचीन भारत में वैज्ञानिक प्रवृत्ति” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में अपना उद्बोधन देते हुए विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अंबिकापुर अतुल कुमार वर्मा ने कहा कि आज के डिजिटल युग में पढ़ना ही कठिन कार्य है आज जब शिक्षक ही नहीं पढ़ते तो वे विद्यार्थियों से कैसे उम्मीद करेंगे कि वे पढ़ें। इसके लिए पहले शिक्षक को प्रतिबद्ध होना होगा कि वह नियमित रूप से स्वाध्याय करें और तभी हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। इस अवसर पर डॉ सुभाष चंद्र चतुर्वेदी ने कहा चोरी उसी के घर होती है जो समृद्ध हो हम बहुत समृद्ध थे इसलिए हम पर निरंतर आक्रांताओं के आक्रमण होते रहे हैं, प्राचीन काल में धर्म से आशय उत्तरदायित्व था जो हमारी जिम्मेदारी होती थी वही हमारा धर्म था 1500 ईसा पूर्व से हमारे सामाजिक मूल्य वसुधैव कुटुंबकम् , सत्य, अहिंसा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझना तथा विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उसके प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार पटेल द्वारा विद्या की देवी माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात सरस्वती वंदना एवं छत्तीसगढ़ राज्यगीत की मधुर प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरे वातावरण में सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गरिमा का संचार हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के संरक्षक एवं प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार पटेल ने की।
सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. चार्ल्स वर्गीज, सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक (मध्यप्रदेश), डॉ. एस.सी. चतुर्वेदी, सहायक प्राध्यापक भौतिक शास्त्र, शासकीय लाहिड़ी स्नातकोत्तर महाविद्यालय चिरमिरी तथा अतुल कुमार वर्मा, सहायक प्राध्यापक राजनीति विज्ञान एवं विशेष कर्तव्य अधिकारी, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा, अंबिकापुर उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान प्रणाली में निहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्राचीन भारतीय अनुसंधान परंपरा और आधुनिक समय में उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
सेमिनार के दौरान विभिन्न विद्वानों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, सहायक प्राध्यापक भूगोल, डॉ. धनसाय देवांगन, सहायक प्राध्यापक रसायन शास्त्र, शासकीय लाहिड़ी स्नातकोत्तर महाविद्यालय चिरमिरी तथा बी.एल. सोनवानी, सहायक प्राध्यापक वाणिज्य, शासकीय नवीन महाविद्यालय पोंड़ी बचरा शामिल रहे। इसके साथ ही महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक ऋषभ बोरकर (प्राणीशास्त्र) एवं डॉ. परमानन्द (भूगोल) ने भी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
सेमिनार में विद्यार्थियों का पंजीकरण अतिथि व्याख्याता गीतिका वर्मा एवं मोनिका मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विनीत कुमार पाण्डेय तथा सह-संयोजक हेमंत बंजारे ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार के अन्य सहायक प्राध्यापक महावीर पैकरा , अतिथि व्याख्याता आशुतोष वर्मा , डॉ अजय पटेल , डॉ कृष्ण कुमार पटेल , डॉ हेमलता दाहिया अशैक्षणिक स्टाफ में बाबू युवराज सिंह जगत, प्रयोगशाला तकनीशियन राम प्रसाद बैगा, सुरजीत सिंह, महरोज बेगम, मो. शमीम खान ,कमलेश बैगा , राजाराम परस्ते, रघुवीर, निखिल एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही। ।