रानी कुंडी, जहां रानी ने जल समाधि ली

रानी कुंडी, जहां रानी ने जल समाधि ली
रानी कुंडी, जहां रानी ने जल समाधि ली

जिला ब्यूरो मृत्युन्जय सोनी 

एमसीबी /मनेंद्रगढ़ जो पहले कारी माटी के नाम से जाना जाता था इसके उत्तर दक्षिण लगभग 40 किलोमीटर उत्तरी हिस्सा तथा 25 किलोमीटर ऐसे पूर्व पश्चिम चारों तरफ ऐतिहासिक पुरातत्व धरोहर विद्यमान है नदी पहाड़ जंगल प्राकृतिक सौंदर्य तथा धार्मिक स्थल मंदिर देवालय हुआ कोयला जो काला हीरा की नगरी के नाम से जाना जाता है आगे मैं बताना चाहता हूं कि मनेंद्रगढ़ से करीब 20 किलोमीटर दक्षिण दिशा की ओर झगरा खाण्ड लेदरी पराडोल बंजी इसके बाद बुंदेली ग्राम है ग्राम के पूर्व दिशा में कौड़िया नाला और हसदो नदी का संगम है तथा साथ में शिव मंदिर के बगल से बारहमासी झरना है किंवदंती है कि धवलपुर ग्राम में 15वीं शताब्दी आसपास राजा धर्मल शाह का राज था जिसका अवशेष नक्काशी किया हुआ पत्थर हैं महल की पहचान बताता है तथा अंदर का सुरंग एवं तालाब आज भी मौजूद है बताया जाता है कि एक बार राजा कहीं युद्ध  करने कहीं बाहर गए थे इस अवसर का लाभ लेने एक नाई ने लीला रचा और रानी से संपर्क कर बताया कि रानी जी राजा तो लड़ाई में मारे गए तो मेरा कहना है कि अब आप अकेली हैं क्यों ना मेरे साथ रहे इसके कपट भरे कुचक्र को रानी स्वीकार नहीं करती है तब वह जबरन उठाकर साथ भागने लगा उधर जब राजा वापस अपने निवास पर आते हैं थोड़ा अपशकुन या खाली महल सा लगने पर संदेह होता है इस बात को संकोच कहे या डर से किसी ने बताने की हिम्मत नहीं की अंत में पता चल गया की रानी यहां नहीं है फिर उदासी क्रोधित होकर राइफल लेकर तलाश में निकल पड़े बताया जाता है कि लेदरी के आगे कोड़ा मार्ग पर नौवा नाला है वही एक चट्टान में राइफल रखकर उनके आने का इंतजार करने लगे बहुत इंतजार के बाद भी पता नहीं चलने पर उन्हें एहसास हुआ या किसी ने बताया या फिर अपने ही अनुमान से वहां से पूर्व की ओर बुंदेली ग्राम है कोई मिला होगा पता चला होगा रानी तो कौड़िया नाला में सती हो गई है तब राजा इस स्थल पर पहुंचते हैं विश्वास के लिए प्रमाण मांगते हैं यदि तुम मेरी धर्मपत्नी हो और यहां सही में समाधि ली हो तो मुझे पहचान बताओ तब उसी  जलाशय से एक हाथ की पांचो उंगलियां दिखाई देती हैं राजा को बड़ी पीड़ा हुई वे दुःख से अपने को नहीं संभाल पाए और वहां से थोड़ी दूर ऊपर इस नाले में जहां थोड़ा कुछ कुंड सा है वही अपनी लीला समाप्त कर देते हैं अर्थात जल समाधि ले लेते हैं और आज वही याद बनी हुई है रानी कुंडी उस स्थान को रानी कुंडी और जहां राजा जल समाधि लिए उसे रजघट्टा नाम से जाना जाता है विख्यात है यही रानीकुंडी का सारांश इतिहास है । यहां पहले आसपास के लोग मकर स्नान शिव दर्शन दान पुण्य किया करते थे परंतु अब लगभग 15 16 वर्षों से मकर संक्रांति में क्षेत्र का बहुत बड़ा भव्य मेला लगता है पांच दिवसीय मेला में कबड्डी शैला सुआ कर्मा भजन कीर्तन चलता है तथा आसपास एवं दूर-दूर से अस्थि विसर्जन मुंडन कराने बीच-बीच में लोग आते रहते हैं अच्छा लगा हो तो अवश्य समय निकाल कर यहां आएं और दर्शन लाभ ले क्योंकि दिनांक 11 जनवरी 2026 को मेला प्रारंभ हो रहा है 14 जनवरी को अंतिम मेला है परिवार सहित इसका लुफ्त उठाइए।