"युवा अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने किया कमाल — सरकारी अस्पताल बना अनुशासन और स्वच्छता की मिसाल"

"जहाँ बदबू थी, अब महकती है सेवा — मनेन्द्रगढ़ अस्पताल ने लिखी नई कहानी"

"युवा अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने किया कमाल — सरकारी अस्पताल बना अनुशासन और स्वच्छता की मिसाल"

जिला ब्यूरो मृत्युंजय सोनी

एमसीबी - मनेन्द्रगढ़ के सिविल हॉस्पिटल का रूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जहाँ पहले अव्यवस्था और अस्वच्छता के हालात थे, वहीं अब पूरे अस्पताल में स्वच्छता, व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं की झलक दिखाई दे रही है। अस्पताल में कदम रखते ही साफ-सफाई और अनुशासन का माहौल महसूस होता है।

समाजसेवी डॉ. रश्मि सोनकर ने निरीक्षण के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि "पहले और अब के अस्पताल में जमीन-आसमान का फर्क दिखाई देता है। जब युवा और ऊर्जावान नेतृत्व के हाथों में जिम्मेदारी होती है, तो नई सोच के साथ हर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश दिखाई देती है।" उन्होंने बताया कि अब अस्पताल में प्रतिदिन तीन बार सफाई होती है और रविवार को विशेष बृहद स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के नेतृत्व में पूरे अस्पताल की व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने वास्तव में यह सिद्ध कर दिखाया है कि कहने और करने में जो फर्क होता है, वह इच्छाशक्ति और मेहनत से मिटाया जा सकता है।

अब अस्पताल में रेफरल केस काफी कम हो गए हैं। हर महीने लगभग 150 सामान्य प्रसव और 15 से 25 सिजेरियन डिलीवरी स्थानीय स्तर पर ही की जा रही हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। डॉ. सोनकर ने बताया कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा कहा गया था कि “सरकारी अस्पतालों को फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा”, और आज मनेन्द्रगढ़ अस्पताल में वही सपना साकार होता दिख रहा है। मंत्रीजी के प्रयासों से जिले में विशेषज्ञ डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, आधुनिक उपकरण, इमरजेंसी सेवाएं और आवश्यक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जा रही हैं। अस्पताल स्टाफ में भी नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। हालांकि अधीक्षक डॉ. तिवारी ने यह भी कहा कि कुछ कमियाँ अभी भी हैं, जिन पर निरंतर सुधार किया जा रहा है।

 डॉ. रश्मि सोनकर ने जनमानस से अपील की कि –

"सरकारी संस्थाओं की साफ-सफाई और रखरखाव हम सबकी जिम्मेदारी है। ये संस्थाएं जनता की सुविधा के लिए बनी हैं, इसलिए नागरिक के रूप में इनकी देखभाल में हमारा भी योगदान होना चाहिए।"