कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती के नए कविता संग्रह "एक अरसे बाद" का विमोचन कार्यक्रम संपन्न
जिला ब्यूरो मृत्युन्जय सोनी
एमसीबी/अनामिका चक्रवर्ती सच्ची साहित्यकार हैं वे जो लिखती हैं वैसा ही जीती हैं वैसे ही कार्य करती हैं,वे महिलाओं के कठिन जीवन पर लिखती हैं तो सब्जी बेचने वाली, कामवाली, सफाईकर्मियों को अपनी संस्था चेतना महिला संगठन के कार्यक्रम में बुलाकर सम्मानित करती हैं। रविवार को शासकीय कन्या महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित क्षेत्र की कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती के प्रकाशित नये काव्य संग्रह "एक अरसे बाद" के विमोचन कार्यक्रम में कवयित्री के लेखन पर बोलते हुए हसदेव धारा साहित्य व कला मंच के संस्थापक सदस्य मृत्युन्जय सोनी ने कहा कि वे अपने आसपास की महिलाओं की घरेलू समास्याओं को भी सुलझाने का प्रयास करती हैं तो उनके बच्चों के लिए कार्यक्रम भी आयोजित करती हैं।
विमोचन कार्यक्रम में संचालन की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए जानी-मानी मंच संचालक वीरांगना श्रीवास्तव ने संचालन के साथ ही अनामिका के रचनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए एवं उनकी कविता का पाठ किया साथी उन्होंने हाल ही में बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के 44 में अधिवेशन में अनामिका चक्रवर्ती को बिहार राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा सम्मानित किए जाने का उल्लेख भी किया।और कहा की हमें बहुत गर्व है कि हमारी साथी साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर हम सबका और हमारे शहर नाम ऊंचा कर रही है
इसी तारतम्य में कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ रामकिंकर पाण्डेय ने कहा कि नगर में तमाम आयोजनों के अलावा साहित्यिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आवश्यक हैं इससे नगर जीवंत बना रहता है डॉ पाण्डेय ने कहा कि साहित्य हमें मनुष्य बनाए रखता है, कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती बहुत साहसिक लेखक हैं वे समाज के वर्जित क्षेत्रों में भी घुसकर अपनी रचनाएं लिखती हैं,वे स्त्री जीवन की चुनौतियों पर बहुत उम्दा रचनाएं लिखती हैं।
इसी कड़ी में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे सूरजपुर कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य बृजलाल साहू जी ने अनामिका की कविताओं पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत किए एवं उनकी समीक्षा की साथ ही बताया बहुत खुशी है कि उनके पहले संग्रह के विमोचन के बाद 12 सालों के पास जब यह संग्रह तो वे इसके विमोचन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित है और उनकी कविताओं से बहुत पहले से ही परिचित है साथ ही उन्होंने कहा उनके कविता संग्रह "धूप के राज महकते हैं" के प्रकाशन के लम्बे अरसे बाद नया संग्रह आया है "एक अरसे बाद" इस संग्रह में स्त्री जीवन की कठिनाईयों, चुनौतियों पर तो बहुत अच्छी कविताएं हैं हीं लेकिन इससे इतर भी बहुत अच्छी कविताएं हैं जैसे "पिता मरते नहीं हैं, सिर्फ उनका अंतिम संस्कार होता है/वे जीवित रहते हैं/हमारे आसपास ही"
अल्पना चक्रवर्ती ने अनामिका चक्रवर्ती पर अपनी कविता में कहा "जिस स्त्री का नाम नहीं होता उसे अनामिका कहते हैं/लेकिन बड़ी सहजता से गढ़ लेती हो/मातृत्व, स्त्रीत्व व वात्सल्य/तुम्हारी सहजता, सरलता ही/तुम्हें सबसे अलग बनाती है"
हसदेव धारा साहित्य व कला मंच के अध्यक्ष रितेश श्रीवास्तव ने कहा कि अनामिका चक्रवर्ती जी की कविताएं हम बहुत समय से पढ़,सुन रहे हैं उन्होंने बताया कि अनामिका जी की कविताएं आम जनजीवन के बीच से निकली हुई कविताएं हैं उनकी कविताओं में प्रकृति, किसान, स्त्री, प्रेम, समाज एवं सामाजिक संबंधों को देखा जा सकता है ।
बैकुंठपुर से पधारे समय क्रांति के संचालक एवं संपादक पत्रकार सम्वर्त कुमार रूप ने अनामिका चक्रवर्ती की कविताओं पर अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए एवं उन्हें बधाई दी। इसी क्रम में मंच से अमूल्य कुमार झा जी ने भी कवयित्री को बधाई देने के साथ उनकी कविताओं पर अपनी विशेष प्रतिक्रिया प्रस्तुत किया। इसी तारतम्य में नगर की उभरती हुई कवयित्री इशिता सिंह ने कहा कि अनामिका मैडम से पहली मुलाकात छ.ग राज भाषा आयोग मे हुई और तबसे लेकर आजतक उनका मार्गदर्शन मिल रहा है। उनकी लेखनी समाज को उजागर और सत्य को सामने लाने वाली है इशिता सिंह ने उनकी कविता "एक थका हुआ मन" कविता का पाठ किया।
कार्यक्रम में नगर के युवा कवि उज्जवल सिंह ने कहा अनामिका चक्रवर्ती जी द्वारा लिखी कविता काल्पनिक कविताएं नहीं होती है। वह हमारे समाज के यथार्थ स्थिति और चरित्र को प्रदर्शित करती है तथा समाज के संकुचित सोच और रूढ़िवादिता पर सीधा प्रहार करती है।
इसी तारतम्य में वरिष्ठ पत्रकार नयन दत्त ने कहा-अनामिका चक्रवर्ती जी की सभी कविताएं वास्तविकता के धरातल से जुड़ी होती हैं उनकी कविताओं की जो मुख्य चरित्र स्त्री और प्रेम हैं इन दोनों पर ही उनकी कलम अपनी अमिट छाप छोड़ती है और उनकी प्रेम कविताओं को पढ़ाते हुए मुझे लगता है जैसे कि धर्मवीर भारती की महान पुस्तक गुनाहों का देवता की किरदार उनकी कविताओं में उतर आए हैं । मैं उनके इस नए काव्य संग्रह की सफलता के लिए उन्हें बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। शहर के वरिष्ठ पत्रकार रामचरित द्विवेदी जी ने उनके संग्रह के लिए बधाई देते हुए उनकी विविध कविताओं के महत्व और गहनता का महत्वपूर्ण उल्लेख किया।
कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती की सासु मां लक्ष्मी रानी चक्रवर्ती ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि अनामिका के ससुर जी की हार्दिक इच्छा थी कि इनका नया काव्य संग्रह प्रकाशित हो आज वे होते तो बहुत प्रसन्न होते अनामिका जितनी अच्छी लेखिका है उतनी ही अच्छी बहू भी हैं जिन्होंने हमारे परिवार को अच्छी तरह संभाला हुआ है।
इस अवसर पर नगर के गायक सरदार हरमहेन्दर सिंह ने तत्काल धुन बनाकर उनकी बहुचर्चित कविता "औरतें तुम जाकर कहीं मर क्यों नहीं जाती" को एक गीत की तरह गाया। इस अवसर पर जयंत चक्रवर्ती अल्पना चक्रवर्ती लक्ष्मी रानी चक्रवर्ती कमला तापस अधिकारी प्रबीर दत्ता स्वदेश रथ, विकास हरमहेन्दर खनुजा गौतम शर्मा गरिमा श्रीवास्तव, वीरांगना श्रीवास्तव, नीलम सोनी, कमला इशिता सिंह, उज्जवल सिंह, बैकुंठपुर के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत पारगिर, सुशांत चक्रवर्ती, रितेश श्रीवास्तव, मृत्युंजय सोनी, सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य नामदेव जी, विजय संजय सेंगर, प्रोफेसर संजीव सोनी, पुष्कर तिवारी ,निगम सर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।